Saturday, 30 January 2021

वो दोनों

 वो दोनों -बलराज सिंह सिद्धू

जब वो दोनों मित्र खेलने जाने के लिए अपने अपने घरवालों से इजाज़त मांगते, तो उनको मार पड़ती।
इधर जट्ट लड़के के माता-पिता गुस्सा होकर कहते, “भैंसों की पूछें मरोड़ने लायक रह जायेगा। पढ़ ले, पढ़ ! जिसकी देखादेखी करता है, उस बढ़ई का क्या है ? न पढ़ा तो हट्टी पर बैठ कर रन्दा चला लेगा। बेटा, तू क्या करेगा ?”
उधर मिस्त्री (रामगढ़िये) लड़के के माँ-बाप फटकार लगाते हुए कहते, “उस लंडे जट्ट का पीछा छोड़। अगर वो न पढ़ा तो हल की मूँठ पकड़ खेत जोत लेगा। बेटा, हमें तो पढ़ना ही पड़ेगा।”
मार खाकर दोनों यार किताबें उठाकर पढ़ने का ढोंग करते बैठ जाते। उनकी माँओं के मिलकर बाज़ार जाने की देर होती कि पीछे से वे खेल के मैदान में खिसक जाते।
शाम ढले खेल-कूद कर जब वापस आ रहे होते तो वे रास्ते में देखते कि अहाते के अंदर बैठकर उनके बाप शराब पी रहे होते।

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